
कल्याण, महाराष्ट्र। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर उत्तर भारतीय बिहारी फ्रंट ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। संगठन ने एक प्रेस नोट जारी कर पेपर लीक प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
संगठन का कहना है कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रेस नोट के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों ने देशभर के अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
उत्तर भारतीय बिहारी फ्रंट ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं को रोकने में सरकारें विफल रही हैं। संगठन का कहना है कि इन मामलों के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन आंदोलनकारियों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय आंदोलनों को दबाने की कोशिश की जा रही है।
फ्रंट ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो सके और प्रभावित छात्रों को न्याय मिल सके।
संगठन ने बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। प्रेस नोट में सरकार से युवाओं के हित में प्रभावी कदम उठाने की अपील की गई है।
उत्तर भारतीय बिहारी फ्रंट ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। संगठन की ओर से जारी यह प्रेस नोट विभिन्न मीडिया संस्थानों को भी भेजा गया है।