अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने भारत की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और इसके बदले अमेरिका से तेल और कृषि उत्पादों की खरीद करेगा। इसके एवज में अमेरिका ने भारत पर लगने वाला टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
इन दावों को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने केंद्र की मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या भारत सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक गई है। आंबेडकर ने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा है।

प्रकाश आंबेडकर ने ट्रंप के एक और दावे का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ हुए कथित सीजफायर में डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की थी, क्या भारत सरकार इस दावे को स्वीकार करती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या वाकई भारत रूस से सस्ता तेल छोड़कर अमेरिका या वेनेजुएला से महंगा तेल आयात करने जा रहा है।

कृषि क्षेत्र को लेकर भी आंबेडकर ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर भारत बड़ी मात्रा में अमेरिकी कृषि उत्पादों का आयात करता है तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ेगा। इससे देश की करीब 40 प्रतिशत आबादी, जो खेती पर निर्भर है, उसकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
प्रकाश आंबेडकर ने इस कथित समझौते को भारत विरोधी और अमेरिका समर्थक करार दिया है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या भारत अब अमेरिका के इशारों पर चल रहा है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से इन तमाम मुद्दों पर देश के सामने साफ और स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।