US: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों के खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। देशभर में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। ‘काम नहीं, स्कूल नहीं, खरीदारी नहीं’ जैसे नारों के साथ लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं। मिनियापोलिस और सेंट पॉल से शुरू हुआ विरोध अब कई राज्यों में फैल चुका है, जहां आम नागरिक, कारोबारी और छात्र एकजुट होकर प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।
हालिया प्रदर्शनों को उस वक्त और बल मिला, जब दो अलग-अलग घटनाओं में एलेक्स प्रेट्टी और रेनी गुड की मौत हो गई। प्रदर्शन के दौरान नर्स एलेक्स प्रेट्टी उस समय गोली लगने से मारी गईं, जब वह बॉर्डर पेट्रोल अधिकारियों द्वारा की जा रही आव्रजन कार्रवाई को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर रही थीं। इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे।

वहीं, सात जनवरी को रेनी गुड की मौत ने भी विवाद को और गहरा कर दिया। आरोप है कि रेनी गुड को उनके वाहन में बैठे हुए आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन यानी आईसीई के अधिकारी ने गोली मार दी। इन दोनों घटनाओं को लेकर मानवाधिकार संगठनों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आव्रजन नीति के नाम पर हिंसा और डर का माहौल बनाया जा रहा है।
प्रदर्शनों के आयोजकों ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी कर कहा है कि मिनियापोलिस और सेंट पॉल के लोगों ने पूरे देश को रास्ता दिखाया है और आईसीई की कार्रवाई को रोकने के लिए इसे पूरी तरह बंद करना जरूरी है। हड़ताल के समर्थन में कई कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की घोषणा की, जबकि एरिजोना और कोलोराडो के कुछ स्कूलों ने छात्रों की भारी अनुपस्थिति की आशंका के चलते कक्षाएं रद्द कर दीं।+

इसके अलावा, कई जगह छात्रों ने स्कूलों से वॉकआउट कर सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। मिशिगन के बर्मिंघम इलाके में शून्य डिग्री तापमान के बावजूद दर्जनों छात्र पैदल मार्च करते नजर आए, जिन्हें राह चलते लोगों ने समर्थन दिया।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति अब केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े मानवीय और सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिख रही है, जिसने पूरे अमेरिका में सरकार और जनता के बीच टकराव को और गहरा कर दिया है।