कल्याण लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर गठित ‘पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप’ में उन्हें शामिल किया गया है। इस पहल के तहत विभिन्न देशों के लिए संसदीय प्रतिनिधिमंडल बनाए गए हैं, जिनमें इंडोनेशिया दौरे पर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. शिंदे करेंगे।
इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत गठित बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल में भी डॉ. शिंदे ने सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाई थी। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, सिएरा लियोन, लाइबेरिया और डीआर कांगो जैसे देशों का दौरा कर भारत का पक्ष मजबूती से रखा था। इस मिशन में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने एकजुट होकर वैश्विक मंच पर भारत की स्पष्ट और सशक्त आवाज़ पेश की थी।

अब पार्लियामेंटरी फ्रेंडशिप ग्रुप्स के माध्यम से भारत की संसदीय कूटनीति को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय संवाद स्थापित किया जाएगा। इन दौरों के दौरान व्यापार, तकनीक, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और द्विपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।
इन प्रतिनिधिमंडलों में वरिष्ठ और युवा नेताओं का व्यापक प्रतिनिधित्व देखने को मिल रहा है। इसमें रविशंकर प्रसाद, पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी. आर. बालू, सुप्रिया सुळे, शशि थरूर, अनुराग ठाकुर, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, डेरेक ओ’ब्रायन, मनीष तिवारी, अभिषेक बनर्जी, कनिमोझी और गौरव गोगोई जैसे दिग्गज नेताओं के साथ डॉ. श्रीकांत शिंदे जैसे युवा सांसद भी शामिल हैं।

इस पहल के अंतर्गत इंडोनेशिया, श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद के सदस्य देशों, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के साथ संसदीय स्तर पर संवाद स्थापित किया जाएगा।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पहल को संसद से संसद और जनता से जनता के स्तर पर रिश्ते मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे भारतीय सांसदों को विभिन्न देशों की संसदीय कार्यप्रणाली को समझने और श्रेष्ठ अनुभवों के आदान-प्रदान का अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे की यह नियुक्ति न केवल उनके राजनीतिक कद को और मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की संसदीय कूटनीति को भी नई दिशा और मजबूती देगी।