Home mumbaiताडदेव- नागपाड़ा और मुंबई सेंट्रल को जोड़ने वाले रेल फ्लाईओवर का नाम ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर उड्डाणपूल’ रखा जाएगा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा

ताडदेव- नागपाड़ा और मुंबई सेंट्रल को जोड़ने वाले रेल फ्लाईओवर का नाम ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर उड्डाणपूल’ रखा जाएगा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा

by Kalpana Shukla
0 comments

मुंबई के ताडदेव- नागपाड़ा और मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण रेल फ्लाईओवर का नाम अब ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर उड्डाणपूल’ होगा। यह घोषणा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। उन्होंने बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा इस फ्लाईओवर का निर्माण रिकॉर्ड समय में पूरा करने के लिए प्रशासन की सराहना भी की।


इस फ्लाईओवर का लोकार्पण 26 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रमुख उपस्थिति में दूरदृश्य प्रणाली के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंबई की महापौर रितू तावडे ने की।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ताडदेव- नागपाड़ा और मुंबई सेंट्रल को जोड़ने वाला यह पुल करीब 130 वर्ष पुराना हो चुका था और उसकी आयु पूरी तरह समाप्त हो गई थी। ऐसे में उसकी पुनर्बांधनी अत्यंत आवश्यक थी। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने 1 अक्टूबर 2024 को इस पुल के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया था, जिसे 6 जनवरी 2026 को महज 15 महीने 6 दिन में पूरा कर लिया गया। उन्होंने विशेष रूप से रेल सीमा क्षेत्र में किए गए चुनौतीपूर्ण कार्य की सराहना करते हुए सभी अभियंताओं और अधिकारियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मुंबई में गोरेगांव–मुलुंड लिंक रोड प्रकल्प के फ्लाईओवर की गोरेगांव दिशा, विद्याविहार रेलवे फ्लाईओवर, सायन रेलवे फ्लाईओवर, महालक्ष्मी रेलवे फ्लाईओवर, नेहरू तारांगण तथा मानखुर्द फ्लाईओवर सहित कुल छह बड़े फ्लाईओवर अंतिम चरण में हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से मुंबई में यातायात जाम की समस्या में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
फ्लाईओवर का नामकरण पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर के नाम पर करने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्यादेवी होलकर ने आदर्श प्रशासन, समाज कल्याण, धर्म संरक्षण और आर्थिक प्रगति का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने महिलाओं की सैन्य टुकड़ी का गठन किया, माहेश्वरी साड़ी उद्योग को बढ़ावा दिया और देशभर में मंदिरों व घाटों का निर्माण कराया। उनके कार्यों को नमन करते हुए इस पुल का नाम उनके नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है। साथ ही उन्होंने महानगरपालिका को नामकरण की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि इस पुल का निर्माण कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। निर्माण के दौरान कई तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन महानगरपालिका ने समय से पहले कार्य पूरा कर मिसाल पेश की। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से बाधित पूर्व- पश्चिम यातायात अब फिर से सुचारु हो सकेगा। जहांगीर बोमन बेहराम मार्ग, डॉ. दादासाहेब भडकमकर मार्ग (ग्रांट रोड), पठ्ठे बापूराव मार्ग और महालक्ष्मी स्टेशन पुल पर यातायात का दबाव कम होगा।

महापौर रितू तावडे ने कहा कि मुंबई जैसे महानगर में सड़कें और फ्लाईओवर शहर की धमनियों के समान हैं। बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या को देखते हुए ऐसे बुनियादी ढांचे का समय पर निर्माण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी और अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर सहित पुल विभाग के सभी अभियंताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के योगदान की सराहना की। साथ ही रेलवे प्रशासन, यातायात पुलिस और अन्य एजेंसियों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया।
इस फ्लाईओवर के शुरू होने से दक्षिण मुंबई के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है, जिससे हजारों यात्रियों और वाहन चालकों को प्रतिदिन राहत मिलेगी।

You may also like

Leave a Comment