मुंबई महापालिका चुनावों के नतीजों के बाद सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के मीडिया विभाग प्रमुख नवनाथ बन ने शिवसेना (उबाठा) गुट और उसके नेताओं पर करारा प्रहार किया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में नवनाथ बन ने कहा कि मुंबई के मतदाताओं ने विकास, सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए भाजपा–महायुति को स्पष्ट जनादेश दिया है, लेकिन इसके बावजूद संजय राऊत नगरसेवकों की तोड़फोड़ और महापौर पद को लेकर भ्रम का माहौल बना रहे हैं।
नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों और पाक समर्थन के सहारे मुंबई का महापौर बैठाने का उबाठा गुट और उसके सहयोगियों का सपना अब पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बार-बार स्पष्ट किया है कि मुंबई का महापौर हिंदू और मराठी होगा, इसके बावजूद संजय राऊत सौदेबाज़ी की राजनीति से बाज़ नहीं आ रहे हैं।

भाजपा मीडिया प्रमुख ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा–महायुति महाराष्ट्र और मुंबई के विकास को नई गति दे रही है। उन्होंने राऊत को आत्ममंथन की सलाह देते हुए सवाल उठाया कि 25 वर्षों तक मुंबई महानगरपालिका में सत्ता में रहने के बावजूद उबाठा गुट सबसे अधिक नगरसेवक क्यों नहीं जिता सका। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा–महायुति के नेता यदि दिल्ली जाते हैं तो इसमें गलत क्या है, जबकि सत्ता के लिए राहुल गांधी की चापलूसी करना और सोनिया गांधी के चरणों में पार्टी समर्पित करना ही वास्तव में राज्य का अपमान है।
नवनाथ बन ने संजय राऊत पर वंदनीय बालासाहेब ठाकरे की विरासत से गद्दारी का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर बालासाहेब आज जीवित होते तो राऊत को अपने विचारों से भटकने पर कड़ी सज़ा देते। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे का नाम लेने का भी राऊत को नैतिक अधिकार नहीं है और महाराष्ट्र के मतदाताओं ने महापालिका चुनावों में ऐसे लोगों को उनकी जगह दिखा दी है।

दावोस यात्रा को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी नवनाथ बन ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का लक्ष्य महाराष्ट्र में अधिक से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाना है और यदि दावोस यात्रा से राज्य में निवेश आ रहा है, तो संजय राऊत को इसमें पेट दर्द क्यों हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा जीत के उन्माद में विश्वास नहीं करती और विकास ही उसकी राजनीति का केंद्र है।