बारामती एयरपोर्ट के पास हुए विमान हादसे को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत के बाद यह सवाल उठ रहा था कि हादसे के वक्त बारामती एयरस्ट्रिप पर फायर फाइटर्स तैनात क्यों नहीं थे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि बारामती एयरस्ट्रिप मुख्य रूप से फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए उपयोग में लाई जाती है और यह कोई पूर्ण रूप से लाइसेंस प्राप्त कमर्शियल एयरपोर्ट नहीं है।

हैदराबाद में विंग्स इंडिया 2026 के दौरान मीडिया से बातचीत में मंत्री ने बताया कि इस हादसे की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) और डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) कर रहे हैं। दुर्घटनास्थल से विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है और जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले में सख्त टाइमलाइन का पालन करेगी ताकि जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाई जा सके।
फायर फाइटर्स की गैरमौजूदगी पर सफाई देते हुए राम मोहन नायडू ने कहा कि यह एयरस्ट्रिप नॉन-शेड्यूल ऑपरेटर्स परमिट (NSOP) के तहत संचालित होती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन के लिए होता है और उसी के अनुरूप यहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसी एयरस्ट्रिप को कमर्शियल एयरपोर्ट के रूप में लाइसेंस दिया जाता है, तब वहां फायर फाइटिंग समेत कई अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य होते हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि भारत एविएशन सेफ्टी प्रोटोकॉल के मामले में दुनिया के सुरक्षित देशों में शामिल है और हवाई सुरक्षा को लेकर सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। उल्लेखनीय है कि 28 जनवरी 2026 को एक चार्टर्ड विमान बारामती एयरपोर्ट के टेबलटॉप रनवे से करीब 200 मीटर की दूरी पर क्रैश लैंड कर गया था, जिसमें अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र सरकार ने इस हादसे की जांच के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसियां जांच में जुटी हुई है।