
नवी मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के वन मंत्री गणेश नाईक ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीति को लेकर बड़ा और बेबाक बयान दिया है। नवी मुंबई में आयोजित जनता दरबार के दौरान उन्होंने कहा कि हर विभाग में कुछ न कुछ कमियां और नालायकी होती हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि सभी राजनेता दूध के धुले नहीं होते और कुछ नेता भी नालायक हैं।
जनता दरबार में नागरिकों की समस्याएं सुनते हुए गणेश नाईक ने अधिकारियों के कामकाज पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले की तुलना में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी कई विभागों में खामियां मौजूद हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि व्यवस्था को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
मंत्री के बयान का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया जब उन्होंने राजनीतिक वर्ग पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी नेता ईमानदार और निष्पक्ष नहीं होते। कुछ नेता ऐसे भी हैं जिनके कामकाज पर सवाल उठते रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
गणेश नाईक के इस बयान को लेकर विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल सकता है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता में रहते हुए किसी मंत्री का इस तरह खुलकर व्यवस्था और नेताओं की कमियों को स्वीकार करना असामान्य माना जाता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि मंत्री के इस बयान पर विपक्ष और महायुति गठबंधन के सहयोगी दल किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं। राजनीतिक हलकों में इसे आने वाले दिनों की बड़ी बहस का विषय माना जा रहा है।