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महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज, विरोधियों के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान

by Real Khabren
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मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि संसद में 2023 में जिस महिला आरक्षण बिल को विपक्ष ने डिलिमिटेशन और जनगणना के साथ लागू करने पर सहमति दी थी, उसी पर अब यू-टर्न लिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने आरोप लगाया कि एनडीए के पास दो-तिहाई बहुमत न होने का फायदा उठाकर विपक्ष ने बिल के खिलाफ मतदान किया, जिससे महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों की “हत्या” हुई है। उन्होंने 17 अप्रैल को संसद में हुई इस घटना को देश के इतिहास का “काला दिन” बताया।


फडणवीस ने ऐलान किया कि अब इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा। महाराष्ट्र से एक करोड़ महिलाओं के हस्ताक्षर जुटाने का अभियान शुरू होगा और महायुति के सभी दल मिलकर विपक्ष के “महिला विरोधी चेहरे” को उजागर करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए डिलिमिटेशन और जनगणना की प्रक्रिया जरूरी है, जो 2023 के संवैधानिक संशोधन का हिस्सा है। कोविड के कारण जनगणना में देरी हुई, लेकिन सरकार की कोशिश है कि 2029 तक यह प्रक्रिया पूरी कर महिला आरक्षण लागू किया जाए।
इतिहास का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि 1976 और 2002 में डिलिमिटेशन को लेकर लिए गए फैसलों के चलते यह प्रक्रिया टलती रही, ताकि दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय न हो। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से संसद में सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, जिससे महिलाओं और अनुसूचित वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए फडणवीस ने कहा कि पार्टी का इतिहास महिलाओं के मुद्दे पर विरोध का रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “झूठ की राजनीति” करने वाला बताया और कहा कि अगर झूठ बोलने की प्रतियोगिता होती, तो वे उसमें स्वर्ण पदक जीतते।
इसके साथ ही उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि महिला आरक्षण उनके सपनों के अनुरूप कदम है, लेकिन विपक्ष ने इसे खारिज कर उनके विचारों के साथ भी अन्याय किया है।
मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं को खुली बहस की चुनौती भी दी और कहा कि देश की महिलाएं आने वाले समय में इस मुद्दे पर जवाब देंगी।

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