मीरा-भाईंदर में मराठी महापौर की मांग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और मराठी एकीकरण समिति ने संयुक्त रूप से आंदोलन किया। आंदोलन से पहले मराठी एकीकरण समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख और अन्य पदाधिकारियों को पुलिस की ओर से नोटिस जारी की गई, जिस पर संगठन ने आपत्ति जताई है।
गोवर्धन देशमुख ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण मोर्चा और आंदोलन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की कि पिछली बार की तरह इस बार दडपशाही का सहारा न लिया जाए। देशमुख ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है।

देशमुख ने अमराठी या गुजराती महापौर बनाए जाने की चर्चा पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर फडणवीस साहेब आयुक्त मेहता को स्पष्ट आदेश दें, तो मीरा-भाईंदर में मराठी महापौर नियुक्त किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि महापौर मराठी ही होगा। ऐसे में अब तक फैसला न होने से मराठी समाज में नाराजगी बढ़ रही है। मराठी एकीकरण समिति ने साफ किया कि अगर सरकार अपने वादे पर अमल करती है, तो वे आंदोलन वापस लेने के लिए भी तैयार हैं।
फिलहाल मीरा-भाईंदर में मराठी अस्मिता और नेतृत्व को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलकों में और गर्माहट देखने को मिल सकती है।