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मुंबई महापालिका में प्रतिक कर्पे बने स्वीकृत नगरसेवक, बीजेपी ने युवा हिंदुत्व चेहरे पर जताया भरोसा

by Suhani Sharma
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मुंबई महापालिका में प्रतिक कर्पे बने

मुंबई की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा संगठनात्मक और रणनीतिक फैसला लेते हुए पार्टी के सचिव और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रतिक कर्पे को मुंबई महापालिका में स्वीकृत नगरसेवक नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को युवा, अध्ययनशील और आक्रामक हिंदुत्व नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


प्रतिक कर्पे लंबे समय से मुंबई के शैक्षणिक, सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े कर्पे पेशे से सनदी लेखापाल हैं और महापालिका के शिक्षा विभाग में नियुक्तियों, स्कूलों में कथित अनियमितताओं, ओबीसी समाज के अधिकारों, पेंशनधारी शिक्षकों की बकाया राशि और एसआरए योजनाओं में शैक्षणिक सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
2014 से राज्य की राजनीति में सक्रिय कर्पे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम के मार्गदर्शन में विभिन्न समितियों में काम किया है। वे भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और तमिलनाडु ओबीसी प्रभारी के रूप में भी संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

महापालिका में कथित भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण की राजनीति और शिक्षा नीतियों में विसंगतियों के खिलाफ उन्होंने ‘पोलखोल अभियान’ चलाया था। मराठी माध्यम के शिक्षकों की नियुक्ति के मुद्दे पर उनकी सक्रियता चर्चा में रही। आज़ाद मैदान में हुए आंदोलनों में भी उन्होंने भाग लेकर मराठी अस्मिता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
स्वीकृत नगरसेवक बनने के बाद प्रतिक कर्पे ने कहा है कि वे मुंबई महानगरपालिका के कामकाज को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाने के लिए ठोस और अध्ययन आधारित भूमिका रखेंगे। शिक्षा, ओबीसी अधिकार, स्कूलों की जमीन की सुरक्षा और एसआरए परियोजनाओं में मूलभूत सुविधाएं उनकी प्राथमिकता होंगी।


मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने भी उनकी नियुक्ति का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि कर्पे जैसे युवा और अध्ययनशील चेहरे से पार्टी की आवाज महापालिका में और प्रभावी होगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आर्थिक विषयों और कानूनी मामलों में उनकी पकड़ को देखते हुए आगामी बजट, शिक्षा नीति और प्रशासनिक फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका दिखाई दे सकती है। ऐसे में प्रतिक कर्पे की यह नियुक्ति केवल एक राजनीतिक पदस्थापना नहीं, बल्कि मुंबई की सियासत में एक नई सक्रिय और आक्रामक भूमिका की शुरुआत मानी जा रही है।

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