महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव और मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी में करारी हार के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। नवनिर्वाचित नगरसेवकों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सत्ता, पैसा और दबाव के बल पर भले ही लोगों को तोड़ा जा सकता है, लेकिन शिवसेना की जमीनी पहचान और कार्यकर्ताओं की निष्ठा को कभी खरीदा नहीं जा सकता।
उद्धव ठाकरे ने चुनावी नतीजों पर बात करते हुए कहा कि पार्टी की ताकत किसी एक चेहरे से नहीं, बल्कि उन कार्यकर्ताओं से बनती है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी शिवसेना का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ चेहरा हूं, असली लड़ाई और मेहनत उन शिवसैनिकों की है, जो गली-मोहल्लों में पार्टी के लिए डटे रहे।” ठाकरे ने यह भी स्वीकार किया कि यह चुनाव ऐसे समय लड़ा गया, जब सत्ता, संसाधन और संस्थागत ताकत उनके पक्ष में नहीं थी।

बीजेपी पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनके विरोधी यह मान बैठे हैं कि कागज, चुनाव चिन्ह और सत्ता के दम पर शिवसेना को खत्म किया जा सकता है, लेकिन “माटी से जुड़ी शिवसेना” को कोई समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने शक्ति, पैसा और धमकी के जरिए दलबदल को बढ़ावा दिया और पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की।
भविष्य को लेकर उद्धव ठाकरे ने संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया। उन्होंने मुंबई में अपनी पार्टी का मेयर बनाने की इच्छा दोहराते हुए कहा कि अंतिम फैसला भले ही ईश्वर के हाथ में हो, लेकिन उनकी लड़ाई जारी रहेगी। पार्टी छोड़कर गए नेताओं पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि विश्वासघात के जरिए हासिल की गई जीत को मराठी जनता कभी माफ नहीं करेगी।

अपने संबोधन के अंत में उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “पैसा उनके पास है, हमारे पास दिल और जज़्बा है।” ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले समय में यही एकजुटता शिवसेना को फिर से मजबूती देगी।