मुंबई:महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक भावनात्मक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री चुना गया है। आज शाम पांच बजे वह डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगी। इससे पहले एनसीपी विधायक दल की बैठक में उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी का नेता चुना जाएगा।
सुनेत्रा पवार का नाम अब तक सक्रिय राजनीति में कम ही सुनाई देता था, लेकिन सत्ता और संगठन के गलियारों में उनकी भूमिका हमेशा अहम मानी जाती रही है। कार्यकर्ताओं के बीच वह ‘वहिनी’ के नाम से पहचानी जाती हैं। राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद सामाजिक, शैक्षणिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में उनका योगदान लगातार रहा है।

सियासी परिवार में जन्मी सुनेत्रा पवार का मायका भी राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके पिता बाजीराव पाटिल एक प्रभावशाली स्थानीय नेता थे, जबकि उनके भाई भी विभिन्न राजनीतिक पदों पर रहे। 1985 में अजित पवार से विवाह के बाद वह पवार परिवार का हिस्सा बनीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खुद को लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रखा और परिवार व सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी।
शिक्षा के क्षेत्र में सुनेत्रा पवार की पहचान मजबूत रही है। औरंगाबाद के एस.बी. कॉलेज से बी.कॉम की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क जैसे औद्योगिक उपक्रमों का नेतृत्व किया, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े। इसके अलावा वह विद्या प्रतिष्ठान ट्रस्ट की ट्रस्टी हैं, जो बारामती और आसपास के इलाकों में 25 हजार से अधिक छात्रों की शिक्षा की जिम्मेदारी संभालता है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 2010 में उन्होंने ‘एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया’ की स्थापना की और इसके माध्यम से केटवाड़ी गांव को देश का पहला ‘इको-विलेज’ बनाने की पहल की।

साल 2024 में सुनेत्रा पवार ने पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। अब पति के निधन के बाद अचानक उनके कंधों पर पार्टी और सरकार की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
62 वर्षीय सुनेत्रा पवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अजित पवार की राजनीतिक विरासत को संभालने और महायुति सरकार में संतुलन बनाए रखने की होगी। निजी शोक के बीच सत्ता की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए आसान नहीं होगा, लेकिन पार्टी और समर्थकों को उनसे नई उम्मीदें हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति आज सिर्फ एक नए डिप्टी सीएम को नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला नेता को देख रही है, जो परिस्थितियों के चलते सत्ता के केंद्र में आई है। सुनेत्रा पवार की यह नई पारी आने वाले समय में राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।