हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच श्रीलंका ने ईरान के नौसैनिक पोत IRIS बुशहर को अपने कंट्रोल में ले लिया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति Anura Kumara Dissanayake ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उनका देश इस संघर्ष में तटस्थ है, लेकिन मानवीय जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेगा।
राष्ट्रपति दिसानायके के मुताबिक ईरानी पोत ने श्रीलंका से शरण देने की गुहार लगाई थी। इसके बाद श्रीलंकाई सरकार, संबंधित अधिकारियों, डिप्लोमैटिक मिशनों और जहाज के कैप्टन के साथ कई दिनों तक बातचीत करती रही। बातचीत के बाद तय किया गया कि जहाज और उसके क्रू को आधिकारिक तौर पर श्रीलंका की निगरानी में लिया जाएगा।

बताया गया है कि जहाज के क्रू मेंबर्स को सुरक्षित तरीके से कोलंबो पोर्ट एरिया के पास लाया जाएगा, जिसके बाद पोत को त्रिंकोमाली हार्बर में शिफ्ट किया जाएगा। श्रीलंका ने साफ किया है कि देश के मुख्य कमर्शियल पोर्ट कोलंबो में इस जहाज को नहीं रोका जाएगा, क्योंकि इससे शिपिंग और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री नियमों को ध्यान में रखकर लिया गया है। श्रीलंका ने 1982 के United Nations Convention on the Law of the Sea के तहत अपने दायित्वों का पालन करते हुए यह कदम उठाया है।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी इलाके में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक फ्रिगेट को टारपीडो हमले में डुबो दिया था, जिसमें बड़ी संख्या में ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई थी। ऐसे में क्षेत्र में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है और श्रीलंका ने खुद को इस संघर्ष में तटस्थ बताते हुए मानवीय आधार पर यह फैसला लिया