पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है। गुजरात के मोरबी में गैस सप्लाई बाधित होने से सिरेमिक उद्योग संकट में आ गया है। प्रोपेन गैस की कमी के कारण करीब 100 फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि लगभग 400 अन्य यूनिट्स पर भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है।
मोरबी को दुनिया के सबसे बड़े सिरेमिक विनिर्माण केंद्रों में गिना जाता है। यहां सैकड़ों फैक्ट्रियां टाइल्स और अन्य सिरेमिक उत्पाद बनाती हैं, जिनकी सप्लाई देश के साथ-साथ कई देशों में निर्यात के जरिए होती है। लेकिन पिछले दो दिनों से प्रोपेन गैस की सप्लाई रुकने के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप पड़ गया है।

मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अरवड़िया के मुताबिक, पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि कई यूनिट्स को मजबूरन उत्पादन रोकना पड़ा है और अगर जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सैकड़ों और फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं।
फिलहाल जिन फैक्ट्रियों को गुजरात गैस के जरिए ईंधन मिल रहा है, वहां काम जारी है। लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस की उपलब्धता अभी लगभग 50 फीसदी तक ही रह गई है। ऐसे में अगर स्थिति नहीं सुधरी तो 20 मार्च तक इन फैक्ट्रियों में भी उत्पादन रुक सकता है।
ईंधन संकट का असर निर्यात पर भी साफ दिखने लगा है। उद्योग के मुताबिक तैयार माल गोदामों में पड़ा हुआ है और शिपमेंट अटक गया है। कई नए एक्सपोर्ट ऑर्डर फिलहाल रोक दिए गए हैं, जिससे उद्योग की फाइनेंशियल साइकिल और भुगतान व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

इस संकट का असर हजारों मजदूरों की रोज़गार पर भी पड़ने की आशंका है। फिलहाल फैक्ट्री मालिक कर्मचारियों को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर उत्पादन लंबे समय तक बंद रहा तो रोजगार पर भी खतरा बढ़ सकता है।
उद्योग संगठनों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और गैस सप्लाई सामान्य कराने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा चलता है और होरमुज जलडमरूमध्य से गैस और ईंधन की सप्लाई प्रभावित होती है, तो मोरबी का सिरेमिक उद्योग बड़े संकट का सामना कर सकता है।