नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाओं की बढ़ती संख्या को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया है। एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि कुछ “नामचीन चेहरों” का एजेंडा बन गया है सुबह अखबार पढ़ना और शाम तक उसी खबर के आधार पर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) दाखिल कर देना।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाओं की गुणवत्ता और उनके पीछे की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। CJI ने कहा कि बिना किसी ठोस जमीनी शोध या तथ्यों की गहराई में जाए केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर दाखिल की जा रही याचिकाएं न्यायपालिका के कीमती समय की बर्बादी हैं। अदालत का समय उन मामलों के लिए है जिनमें वास्तविक जनहित और गंभीर कानूनी प्रश्न शामिल हों।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि कई बार ऐसी याचिकाओं का उद्देश्य जनहित से अधिक विकास परियोजनाओं को रोकना या सुर्खियां बटोरना होता है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन’ और ‘पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन’ के रूप में दायर की जा रही याचिकाओं को शुरुआती स्तर पर ही खारिज किया जा सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि जनहित के नाम पर दायर कई याचिकाएं वास्तव में निजी स्वार्थ या प्रचार पाने की मंशा से प्रेरित होती हैं। अदालत ने तब भी ऐसी प्रवृत्ति को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया था।
ताजा टिप्पणी से साफ है कि शीर्ष अदालत अब जनहित याचिकाओं की बढ़ती संख्या और उनकी विश्वसनीयता को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाने जा रही है, ताकि न्यायिक समय और संसाधनों का उपयोग वास्तविक और गंभीर मामलों में हो सके।