मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत में एलपीजी गैस सप्लाई को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। संभावित गैस संकट और जमाखोरी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम यानी ESMA लागू कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना और बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने से रोकना है।
सरकार ने तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में मोड़ने के लिए भी कहा गया है, ताकि घरेलू गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।

दरअसल भारत की एलपीजी खपत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश में करीब 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत हुई, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन देश के भीतर हुआ, जबकि बाकी गैस का आयात करना पड़ा। ऐसे में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने की आशंका ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और वितरण की प्राथमिकताएं भी तय कर दी हैं। इसके अनुसार सबसे पहली प्राथमिकता पाइप से मिलने वाली घरेलू गैस PNG और वाहनों के लिए CNG को दी गई है, जिन्हें 100 फीसदी गैस उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। वहीं दूसरी प्राथमिकता उर्वरक बनाने वाले प्लांट्स को दी गई है, जिन्हें उनकी औसत जरूरत का लगभग 70 फीसदी गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

इस बीच महाराष्ट्र के कई शहरों में गैस सिलेंडर को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। रत्नागिरी और कोल्हापुर में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बाद भी 10 से 15 दिन तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है, जिससे लोगों में सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है।
हालांकि गैस एजेंसियों का दावा है कि फिलहाल घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन युद्ध के हालात और संभावित सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते कई जगहों पर पैनिक बुकिंग और सिलेंडर की जमाखोरी बढ़ने लगी है। इसी स्थिति को नियंत्रित करने और बाजार में गैस की सुचारु उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने ESMA लागू कर सख्त कदम उठाया है।