पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा ESMA लागू किए जाने के बाद वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने मोदी सरकार की ऊर्जा नीति पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले तक सरकार देश में सब कुछ सामान्य होने का दावा कर रही थी, लेकिन अचानक ESMA लागू करना यह दिखाता है कि स्थिति गंभीर है और सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी।
प्रकाश आंबेडकर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वर्षों से ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दे रही है, लेकिन गैस के पर्याप्त भंडार और उससे जुड़ी बुनियादी सुविधाओं में निवेश करने में सरकार पूरी तरह विफल रही। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष की आशंका पहले से थी, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती थी, फिर भी सरकार ने समय रहते कोई ठोस तैयारी नहीं की।
आंबेडकर ने यह भी कहा कि अल्जेरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से गैस आयात के विकल्पों को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। उनका आरोप है कि जब तक अमेरिका–ईरान तनाव वास्तविक संकट में नहीं बदल गया, तब तक सरकार ने इन विकल्पों को प्राथमिकता नहीं दी।

उन्होंने चेतावनी दी कि गैस की कमी और कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का असर छोटे ढाबों, रेस्टोरेंट्स, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ेगा। इसके साथ ही शादी-ब्याह और धार्मिक कार्यक्रमों में केटरिंग का काम करने वाले लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।
आंबेडकर ने कहा कि LPG पर चलने वाले लाखों ऑटो और टैक्सी चालकों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं गैस की कमी का असर उर्वरक उद्योग पर पड़ सकता है, जिससे कृषि उत्पादन कम होने और खाद्यान्न महंगे होने की आशंका भी बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल CNG को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लंबा चला तो CNG पर निर्भर भारतीय उद्योगों और परिवहन क्षेत्र पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रकाश आंबेडकर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की नीतियों के कारण देश के मध्यम वर्ग और गरीब जनता पर आर्थिक संकट का खतरा बढ़ सकता है।