लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। इस प्रस्ताव पर सदन में करीब दस घंटे तक लंबी और तीखी बहस चली, जिसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने सरकार की ओर से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर किसी एक दल के नहीं होते, बल्कि पूरे सदन के होते हैं और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।
अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर विपक्ष को सरकार से इतनी ही आपत्ति है तो वह प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए, लेकिन स्पीकर के पद को राजनीतिक विवादों में घसीटना सही नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नेहरू सरकार के समय चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया था और डोकलाम विवाद के दौरान कांग्रेस नेताओं की चीन के दूतावास में बैठकों पर भी सवाल उठाए।
दरअसल, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए यह प्रस्ताव पेश किया था, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला। विपक्ष के कुल 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे और आरोप लगाया था कि स्पीकर ने कई मौकों पर निष्पक्षता बनाए रखने के बजाय सत्तापक्ष के पक्ष में रुख अपनाया।

सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सवाल उठाया कि इस बहस की अध्यक्षता के लिए किसी नए सदस्य का चुनाव क्यों नहीं कराया गया और पीठासीन सदस्य का चयन किस आधार पर किया गया। हालांकि, भाजपा नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही संसदीय नियमों के तहत ही चल रही है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सदन में “माइनस ट्रिपल सी” यानी बिना सिविक सेंस, कॉमन सेंस और संवैधानिक समझ के साथ आते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेताओं को सुर्खियों में बने रहने का डर रहता है।

लंबी बहस के बाद जब प्रस्ताव पर निर्णय की बारी आई तो किसी भी सदस्य ने औपचारिक वोटिंग की मांग नहीं की। ऐसे में स्पीकर के खिलाफ लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ा दी गई।