Home ट्रेंडिंगफिलीपींस में मिला 10 हजार साल पुराना त्रिशूल और 3 हजार साल पुराना वज्र

फिलीपींस में मिला 10 हजार साल पुराना त्रिशूल और 3 हजार साल पुराना वज्र

0 comments

फिलीपींस में खनन के दौरान मिली एक खोज ने सनातन धर्म और प्राचीन भारतीय सभ्यता से जुड़े नए सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय शोधकर्ता और व्यवसायी सैयद शमीर हुसैन ने दावा किया है कि उन्हें फिलीपींस में खुदाई के दौरान भगवान शिव से जुड़ा 10 हजार साल पुराना त्रिशूल और भगवान इंद्र से जुड़ा 3 हजार साल पुराना वज्र मिला है।

सैयद शमीर हुसैन के अनुसार यह खोज मई 2015 में फिलीपींस में तांबे और सोने की खनन गतिविधियों के दौरान हुई थी। उस समय वे स्थानीय लोगों के साथ मिलकर खनन कार्य से जुड़े हुए थे। बताया जाता है कि 5 मई 2015 को खनन स्थल पर काम कर रहे श्रम पर्यवेक्षक को कुछ असामान्य दिखाई दिया, जिसके बाद उन्होंने हुसैन को तुरंत वहां बुलाया।

जब हुसैन वहां पहुंचे तो उन्हें जमीन के अंदर से निकले कुछ ऐसे धातु के अवशेष दिखाई दिए जो सामान्य खनन सामग्री से बिल्कुल अलग थे। इन वस्तुओं को देखकर वे काफी हैरान हो गए। बाद में उन्होंने इन वस्तुओं की पहचान भगवान शिव के त्रिशूल और भगवान इंद्र के वज्र के रूप में की।

हुसैन का दावा है कि मिला हुआ त्रिशूल लगभग 10,000 साल पुराना है, जबकि इसके साथ मिला वज्र करीब 3,000 साल पुराना बताया जा रहा है। उनका कहना है कि ये दोनों वस्तुएँ सिर्फ धातु के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता और सनातन धर्म से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतीक हो सकते हैं।इन दुर्लभ पुरावशेषों को 2016 में भारत लाया गया, जिसके बाद उनकी ऐतिहासिकता और प्रामाणिकता को समझने के लिए लंबे समय तक शोध किया गया।

सैयद शमीर हुसैन के अनुसार उन्होंने इन वस्तुओं पर लगभग 10 वर्षों तक गहन अध्ययन और खोज की। इस दौरान उन्होंने इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और धार्मिक विशेषज्ञों से भी चर्चा की।हुसैन का कहना है कि उनकी इस खोज से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़, शोध रिपोर्ट और प्रमाण उनके पास सुरक्षित मौजूद हैं। इन दस्तावेज़ों में उन पुरावशेषों की खोज, उनकी जांच और उनसे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों से संबंधित जानकारी शामिल है।वे इससे पहले मुंबई, नई दिल्ली और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने इन कलाकृतियों और उनके दस्तावेज़ों को मीडिया और शोधकर्ताओं के सामने प्रस्तुत किया था।

अब सैयद शमीर हुसैन ने घोषणा की है कि आने वाले 10 जून को इन दुर्लभ कलाकृतियों का ऑक्शन (नीलामी) किया जाएगा। उनका कहना है कि इस नीलामी के माध्यम से इन ऐतिहासिक वस्तुओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने और उनके महत्व को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की जाएगी।हुसैन का मानना है कि ये पुरावशेष केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति की गहरी जड़ों को दर्शाते हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि इनकी जानकारी दुनिया भर के लोगों तक पहुंचे और इन पर आगे भी शोध किया जाए।

You may also like

Leave a Comment