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मुंबई में ‘उबाठा’ गुट में टकराव तेज, आदित्य ठाकरे बनाम संजय राउत भाजपा का बड़ा हमला

by Suhani Sharma
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मुंबई में ‘उबाठा’ गुट में टकराव

मुंबई की राजनीति में इस वक्त ‘उबाठा’ गुट के भीतर सियासी घमासान तेज होता नजर आ रहा है। पार्टी के अंदर कथित तौर पर दो धड़ों की लड़ाई खुलकर सामने आने लगी है एक तरफ युवा चेहरा आदित्य ठाकरे और दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता संजय राउत।

दरअसल, आदित्य ठाकरे को पार्टी का कार्याध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं ने इस अंदरूनी खींचतान को और हवा दे दी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने साफ कहा है कि उन्हें इस तरह के किसी भी निर्णय की जानकारी नहीं है। राउत के इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पार्टी के बड़े फैसलों से उन्हें दूर रखा जा रहा है, या फिर पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति गहराती जा रही है।

इसी मुद्दे को लेकर भाजपा ने भी तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया है कि संजय राउत खुद पार्टी की कमान संभालना चाहते हैं और इसके लिए वे अपने समर्थक गुट के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राउत, आदित्य ठाकरे को कार्याध्यक्ष बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं और यही वजह है कि उनके खिलाफ अफवाहों का दौर भी चलाया जा रहा है।


नवनाथ बन ने यह भी दावा किया कि आदित्य ठाकरे ने बिना ज्यादा चर्चा के कार्याध्यक्ष बनने की रणनीति बनाई है, जिससे पार्टी के अंदर टकराव और तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उबाठा गुट में आखिरकार किसका पलड़ा भारी पड़ता है आदित्य ठाकरे या संजय राउत।
इसके साथ ही भाजपा ने संजय राउत के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठाए हैं। नवनाथ बन का कहना है कि आने वाले समय में राउत की राज्यसभा सदस्यता खत्म होने के बाद उनके लिए पार्टी में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।


भाजपा ने इस पूरे विवाद को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा है। बन ने कहा कि देश में सीटों की संख्या बढ़ने से कोई संकट नहीं है, बल्कि असली संकट विपक्षी दलों के भीतर है, जहां नेतृत्व और संगठन को लेकर लगातार संघर्ष चल रहा है।
फिलहाल, मुंबई की सियासत में यह अंदरूनी टकराव चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘उबाठा’ गुट की कमान किसके हाथ में जाती है और इस सियासी संघर्ष का पार्टी पर क्या असर पड़ता है।

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