मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में महाराष्ट्र की सियासत का सबसे बड़ा किला ढह गया है। बीएमसी में तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का वर्चस्व खत्म हो गया है। रुझानों और शुरुआती नतीजों में शिंदे की शिवसेना और बीजेपी गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही मुंबई की सत्ता में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत मानी जा रही है।
शुक्रवार सुबह 10 बजे शुरू हुई मतगणना के बाद तस्वीर तेजी से साफ होती गई। कुल 1700 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला हुआ, जिसमें बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर पहली बार इतना बहुमत हासिल कर लिया है कि बीएमसी में उनका महापौर बनना तय माना जा रहा है। इस जीत के साथ ही उद्धव ठाकरे की शिवसेना दूसरे स्थान पर खिसक गई है और मुंबई में विपक्ष की भूमिका में आ गई है।

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में भी महायुति की जबरदस्त लहर देखने को मिली है। इनमें से 26 नगर निगमों में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया है।
राज्यभर में आए इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि शहरी राजनीति में बीजेपी और महायुति की पकड़ और मजबूत हुई है।
बीएमसी का इतिहास देखें तो 1997 से 2022 तक शिवसेना के 12 मेयर रहे। 1997 में मिलिंद वैद्य से शुरू हुआ यह सिलसिला 2022 तक लगातार जारी रहा। इस दौरान किशोरी पेडनेकर, विशाखा राउत, नंदू सटम, हरेश्वर पाटिल, महादेव देवले, दत्ता दलवी, शुभा राउल, श्रद्धा जाधव, सुनील प्रभु, स्नेहल आंबेकर और विश्वनाथ महादेश्वर जैसे नामों ने मेयर पद संभाला। लेकिन 2026 के चुनाव में यह परंपरा टूट गई है।

नतीजों के बाद मुंबई बीजेपी कार्यालय में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद बीजेपी दफ्तर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास की जीत है। फडणवीस ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चौहान के नेतृत्व में यह महाविजय हासिल हुई है और मुंबई में महायुति का ही महापौर बनेगा।
देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को हिंदुत्व और विकास की राजनीति की जीत बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों पर भरोसा जताया है और उसी विश्वास की यह विजय है। फडणवीस के मुताबिक महानगरपालिकाओं में मिला जनसमर्थन साफ संकेत है कि शहरी मतदाता विकास और मजबूत नेतृत्व के साथ खड़ा है।
बीएमसी के इन नतीजों ने न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदलने का संकेत दे दिया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि नई सत्ता मुंबई के प्रशासन और विकास को किस दिशा में ले जाती है।