कोलकाता से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जहां पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कई बड़े आरोप लगाए।

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव के दौरान जो कुछ हुआ, वह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि लंबी वोटिंग प्रक्रिया के बावजूद ईवीएम मशीनें 80 से 95 प्रतिशत तक चार्ज कैसे रह सकती हैं। उनके मुताबिक यह एक गंभीर संदेह पैदा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक दो दिन पहले ही उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया और कई जगहों पर छापेमारी की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और एसडीएम स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच एक तरह की मिलीभगत थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने पूरी सरकारी मशीनरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिसमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक का हस्तक्षेप शामिल था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से लगभग 90 लाख नाम हटाए गए, हालांकि कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 32 लाख नाम फिर से जोड़े गए।
टीएमसी प्रमुख ने अपने कार्यकर्ताओं पर हमलों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोलकाता से लेकर जंगलमहल तक उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह गुंडों के जरिए हिंसा का माहौल बना रही है।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि काउंटिंग सेंटर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक महिला उम्मीदवार के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो अन्य उम्मीदवारों के साथ क्या हुआ होगा।
इस बीच, उन्होंने बताया कि विपक्षी गठबंधन के कई बड़े नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन ने उन्हें फोन कर समर्थन जताया है।
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव परिणामों की जांच के लिए 10 सांसदों की एक कमेटी बनाई गई है। उन्होंने पूरे चुनाव को “बंगाल के लिए काला अध्याय” बताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में विपक्ष की एकजुटता और मजबूत होगी।