करीब 25 हजार करोड़ रुपये के चर्चित महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB) घोटाले में बड़ी कानूनी राहत सामने आई है। मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार और मौजूदा डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार समेत 70 से अधिक लोगों को क्लीन चिट दे दी है।
स्पेशल जज महेश जाधव ने EOW की ‘C-समरी’ रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए माना कि जांच में किसी भी तरह का आपराधिक मामला साबित नहीं होता। C-समरी रिपोर्ट का अर्थ है कि दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले।
यह मामला साल 2019 में तब शुरू हुआ था, जब मुंबई हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि MSCB और कुछ जिला सहकारी बैंकों ने चीनी मिलों को नियमों के विरुद्ध लोन वितरित किए। यह भी कहा गया था कि कुछ फैक्ट्रियों को बिना उचित प्रक्रिया के कम कीमत पर बेचा गया।

हालांकि, EOW की 35 पन्नों की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि जिन प्रमुख ट्रांजैक्शनों की जांच की गई, उनमें आपराधिक गड़बड़ी के सबूत नहीं मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक को किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान सिद्ध नहीं हुआ और जिन लोन को लेकर सवाल उठे थे, उनमें से 1,343 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली भी की जा चुकी है।
स्पेशल कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की दायर प्रोटेस्ट पिटीशन और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इंटरवेंशन अर्जी भी खारिज कर दी।
गौरतलब है कि ED ने इसी एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर दो चार्जशीट दाखिल की थीं। ऐसे में स्पेशल कोर्ट के इस फैसले का असर ED की कार्यवाही पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल, इस निर्णय को पवार परिवार के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, जबकि विपक्ष इस मामले में आगे की रणनीति पर विचार कर सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह फैसला एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।