Home देशअंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता संग्राम: उप-नगराध्यक्ष चुनाव में चप्पलें चलीं, होटल पॉलिटिक्स के बीच शिवसेना महायुति की जीत

अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता संग्राम: उप-नगराध्यक्ष चुनाव में चप्पलें चलीं, होटल पॉलिटिक्स के बीच शिवसेना महायुति की जीत

by Real Khabren
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अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता संग्राम:

अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता की जंग आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। उप-नगराध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान परिषद सदन रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जहां तीखी बहस, नारेबाजी और यहां तक कि चप्पलें चलने की तस्वीरें सामने आईं। भारी राजनीतिक उठा-पटक, होटल पॉलिटिक्स और गुटबाजी के बीच शिवसेना महायुति ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए भारतीय जनता पार्टी को करारा झटका दिया।

उप-नगराध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में शिवसेना महायुति के उम्मीदवार सदाशिव पाटिल ने 32 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी समर्थित उम्मीदवार को 28 वोटों से संतोष करना पड़ा। जीत के साथ ही शिवसेना खेमे में जश्न का माहौल देखने को मिला।

दरअसल, हालिया नगर परिषद चुनावों में शिवसेना 27 नगरसेवकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 50 प्रतिशत से अधिक मत मिले थे। इसके बावजूद प्रत्यक्ष रूप से हुए नगराध्यक्ष चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल ने बाजी मार ली थी।

हालांकि, परिषद में केवल 15 नगरसेवकों के दम पर बीजेपी को सत्ता संतुलन साधने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस के 12 नगरसेवकों, एनसीपी (अजित पवार गुट) के चार नगरसेवकों और एक निर्दलीय के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ का गठन किया। यह गठबंधन राजनीतिक रूप से असहज साबित हुआ और कांग्रेस ने अपने 12 नगरसेवकों को पार्टी से निलंबित कर दिया, जिसके बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए।

इसी बीच, कल्याण के सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने मोर्चा संभालते हुए सियासी समीकरण पलट दिए। उन्होंने एनसीपी (अजित गुट) के चार नगरसेवकों को बीजेपी समर्थित गुट से अलग कर शिवसेना, एनसीपी और एक निर्दलीय के साथ मिलकर ‘शिवसेना महायुति अंबरनाथ’ नाम से नया गुट बनाया। इस नए गठजोड़ के साथ शिवसेना महायुति के पास 32 नगरसेवकों का स्पष्ट बहुमत हो गया।

चुनाव से पहले संभावित टूट को रोकने के लिए दोनों पक्षों ने अपने-अपने नगरसेवकों को अलग-अलग होटलों में ठहराया, जिससे एक बार फिर ‘होटल पॉलिटिक्स’ चर्चा में रही। मतदान के दिन नगर परिषद परिसर में भारी हंगामा हुआ। व्हिप को लेकर विवाद बढ़ा और आम सभा के दौरान बीजेपी और शिवसेना पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई और चप्पलें चलने तक पहुंच गई।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मुकाबला एकनाथ और श्रीकांत शिंदे के संसदीय क्षेत्र में आने वाले शिवसेना के गढ़ को बचाने की लड़ाई थी, जिसमें शिवसेना महायुति सफल रही, जबकि बीजेपी प्रदेश नेतृत्व की रणनीति नाकाम साबित हुई।

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