अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। अगले दौर की वार्ता Geneva में होने वाली है। ओमान की मध्यस्थता में हो रही इस बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका लगातार यह साफ कर रहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं होनी चाहिए। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने वार्ता विफल होने की स्थिति में ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी भी बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष मसौदा प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, हालांकि मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के मुद्दे पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है।

अमेरिका और ईरान दोनों ने संकेत दिया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो तनाव और बढ़ सकता है। पूरी दुनिया की नजर अब जेनेवा में होने वाली इस निर्णायक वार्ता पर है।