तमिलनाडु की राजनीति इस समय बड़े सियासी उथल‑पुथल के दौर से गुजर रही है। लंबे समय से डीएमके के साथ गठबंधन में चल रही कांग्रेस अब खुलकर नाराज़ नजर आ रही है। वजह है—सीटों का बंटवारा और उससे भी बड़ा मुद्दा सत्ता में हिस्सेदारी।
कांग्रेस ने डीएमके के सामने अपना रुख साफ कर दिया है कि अब वह सिर्फ चुनावी समझौते तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी का कहना है कि यदि गठबंधन जारी रखना है, तो सरकार में भागीदारी भी तय होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक डीएमके कांग्रेस को केवल 32 सीटों का प्रस्ताव दे रही है, जिसे कांग्रेस नेतृत्व अपर्याप्त मान रहा है।
सीट शेयरिंग को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत कई दौर में हो चुकी है, लेकिन सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस का मानना है कि राज्य में उसकी संगठनात्मक मौजूदगी और राष्ट्रीय भूमिका को देखते हुए उसे अधिक सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। यही वजह है कि पार्टी ने दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

इसी बीच तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की नई राजनीतिक पार्टी TVK (तमिलगा वेत्रि कझगम) ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। TVK ने कांग्रेस को ‘स्वाभाविक सहयोगी’ बताते हुए संकेत दिया है कि भविष्य में दोनों दल साथ आ सकते हैं। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस किसके साथ जाएगी—पुराने सहयोगी डीएमके के साथ या फिर विजय की नई पार्टी TVK के साथ नया राजनीतिक दांव खेलेगी? डीएमके के लिए कांग्रेस का असंतोष खतरे की घंटी माना जा रहा है, वहीं TVK के लिए यह मौका खुद को बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने का है।
इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। फैसला चाहे जो भी हो, उसका असर न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।
तमिलनाडु की सियासत अब आर‑पार के मोड़ पर खड़ी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कांग्रेस पुराने गठबंधन को बचाती है या फिर नए राजनीतिक रास्ते पर कदम रखती है।
