Home देशनाती को मराठी स्कूल में दाखिला दिलाकर दिखाएं”अमित साटम का राज ठाकरे पर तीखा हमला

नाती को मराठी स्कूल में दाखिला दिलाकर दिखाएं”अमित साटम का राज ठाकरे पर तीखा हमला

by Real Khabren
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नाती को मराठी स्कूल में दाखिला

मुंबई :मनसे प्रमुख राज ठाकरे की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में भाजपा मुंबई अध्यक्ष अमित साटम ने दादर स्थित वसंतस्मृति कार्यालय में पत्रकार परिषद लेकर जोरदार पलटवार किया। अमित साटम ने राज ठाकरे पर मराठी युवाओं और उद्योग के मुद्दे पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कई तीखे सवाल खड़े किए।

अमित साटम ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में ठाकरे बंधुओं के ढोंग और दुटप्पी रवैये को उजागर किया है। इसके बाद राज ठाकरे ने उद्योगपतियों को लेकर आपत्ति जताई, लेकिन साटम के मुताबिक, मराठी युवाओं को वास्तव में उद्यमी बनाने का काम केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे बंधुओं ने मराठी युवाओं को उद्योग के नाम पर सिर्फ वडापाव की गाड़ी तक सीमित रखा।

साटम ने 1997 में स्थापित शिवउद्योग सेना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मंच से कितने मराठी युवाओं को वास्तविक उद्योग मिले और कितनों को आगे बढ़ाया गया, इसका जवाब राज ठाकरे को देना चाहिए। उन्होंने कोहिनूर मिल की जमीन पर बने कोहिनूर मॉल का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां कितने मराठी युवाओं को रोजगार मिला।

मराठी भाषा के मुद्दे पर हमला बोलते हुए अमित साटम ने कहा कि राज ठाकरे मराठी की सख्ती की बात करते हैं, लेकिन उनके अपने बच्चे मराठी माध्यम के स्कूलों में क्यों नहीं पढ़े। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ठाकरे परिवार ने जर्मन और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं क्यों सीखीं। इसी संदर्भ में साटम ने राज ठाकरे को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि मराठी भाषा और संस्कृति की इतनी चिंता है, तो वे अपने नाती का दाखिला बालमोहन विद्यामंदिर जैसे मराठी माध्यम के स्कूल में लेकर दिखाएं।

अदानी मुद्दे पर भी अमित साटम ने ठाकरे परिवार को घेरा। उन्होंने कहा कि अगर अदानी को लेकर आपत्ति है, तो पहले यह स्पष्ट किया जाए कि उनसे मुलाकातें क्यों की गईं और उन्हें घर क्यों बुलाया गया। साटम ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की बात करने वाले ठाकरे 25 वर्षों तक मुंबई महानगरपालिका में सत्ता में रहते हुए खुद जवाबदेही से नहीं बच सकते।

अंत में अमित साटम ने कहा कि 2019 के बाद उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की राजनीति को बेहद निचले स्तर पर पहुंचाया है और जनता अब इन विरोधाभासों को भली-भांति समझ चुकी है

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