नासिक महानगरपालिका चुनाव से पहले सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया, जब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने नासिक में संयुक्त जनसभा कर भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर सीधा हमला बोला। दोनों ठाकरे नेताओं ने एक मंच से भाजपा के हिंदुत्व, शासन और कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए मतदाताओं से बड़ा संदेश दिया।
सभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा का हिंदुत्व केवल चुनावी दिखावा बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की तपोभूमि से जुड़े क्षेत्रों में पेड़ों को काटकर औद्योगिक घरानों को जमीन सौंपने की साजिश रची जा रही है।

राज ठाकरे ने दावा किया कि जब 2012 में नासिक महानगरपालिका की सत्ता उनके हाथ में थी, तब शहर की तस्वीर बदली गई थी और विकास के काम जमीन पर दिखे थे।
वहीं उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा अब गुंडों और भ्रष्टाचारियों को अपनी पार्टी में शामिल कर रही है और ऐसे लोगों को टिकट भी दे रही है। उद्धव ठाकरे ने सलीम कुत्ता से जुड़े लोगों को टिकट देने का आरोप लगाते हुए भाजपा की नैतिकता पर सवाल खड़े किए।
दोनों नेताओं ने महाकुंभ के दौरान कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया और कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। नासिक की जर्जर सड़कों, पेयजल संकट, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी भाजपा को कठघरे में खड़ा किया गया।

ठाकरे बंधुओं ने मतदाताओं से अपील की कि वे पैसे और लालच में आकर वोट न दें और अपने शहर के भविष्य के लिए सही फैसला करें। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने निर्वाचन आयोग पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के इशारों पर काम कर रहा है।
नासिक महानगरपालिका चुनाव के लिहाज से इस संयुक्त रैली को बेहद अहम माना जा रहा है। ठाकरे बंधुओं का एक मंच पर आना न केवल स्थानीय राजनीति बल्कि महाराष्ट्र की सियासत में भी नए समीकरणों के संकेत दे रहा।