पुणे जिला परिषद की आगामी 2025–26 की चुनावी प्रक्रिया से पहले जिले की राजनीति में एक बड़ा और अहम बदलाव सामने आया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन की घोषणा करते हुए एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस महाआघाड़ी के तहत पुणे जिला परिषद की कुल 73 सीटों और उसके अंतर्गत आने वाली पंचायत समिति की 146 सीटों पर दोनों दल संयुक्त रूप से उम्मीदवार उतारेंगे।
इस गठबंधन की घोषणा पुणे जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष श्रीरंग पाटील और वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय सचिव एवं पुणे जिला समन्वयक एडवोकेट प्रियदर्शी तेलंग ने संयुक्त पत्रकार परिषद में की। इस दौरान दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि संविधान विरोधी और जातिवादी ताकतों के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक विकल्प खड़ा करने के उद्देश्य से किया गया है।

नेताओं का कहना है कि बहुजन, वंचित और शोषित वर्गों का मत विभाजित न हो, और सामाजिक न्याय तथा संविधानिक मूल्यों की विचारधारा को मजबूती मिले, इसी सोच के साथ यह महाआघाड़ी बनाई गई है। ग्रामीण इलाकों में इन वर्गों की एकजुटता से एक प्रभावी राजनीतिक परिवर्तन संभव है, ऐसा विश्वास भी उन्होंने व्यक्त किया।
बताया गया है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से जमीनी स्तर की चर्चाओं पर आधारित रही है। दोनों दलों के तालुका स्तर के अध्यक्षों ने स्थानीय परिस्थितियों का आकलन कर संभावित उम्मीदवारों के नाम सुझाए हैं, जिन्हें जिला स्तर के नेतृत्व ने अंतिम मंजूरी दी है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीटों के अंतिम बंटवारे की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

इस पत्रकार परिषद में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी द्वारा पुणे जिला परिषद चुनाव के लिए नियुक्त पर्यवेक्षक प्रशांत जगताप और एडवोकेट अभय छाजेड के साथ-साथ वंचित बहुजन आघाड़ी के विशाल गवली सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी की इस एकजुटता को पुणे जिले की ग्रामीण राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आगामी जिला परिषद चुनाव में राजनीतिक समीकरणों के बदलने की पूरी संभावना जताई जा रही