मुंबई। होलिका दहन और धुलिवंदन/रंगपंचमी के पर्व को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से खास अपील की है कि त्योहार को आनंद के साथ-साथ जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर मनाया जाए।
महानगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि होलिका दहन के लिए किसी भी प्रकार से पेड़ों या उनकी टहनियों की कटाई न की जाए। सोमवार, 2 मार्च 2026 को होने वाले होलिका दहन के लिए केवल सूखी लकड़ियों का उपयोग कर पारंपरिक तरीके से उत्सव मनाने की अपील की गई है। साथ ही रसायनयुक्त रंगों से रंगी लकड़ी, प्लास्टिक, रबर, टायर या अन्य हानिकारक पदार्थों को जलाने से सख्त परहेज करने को कहा गया है, क्योंकि इससे निकलने वाला धुआं और प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है।

महानगरपालिका प्रशासन ने गृहनिर्माण सहकारी समितियों और स्थानीय समुदायों से भी अपील की है कि वे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से होलिका दहन का आयोजन करें और शहर को स्वच्छ एवं निरोगी बनाए रखने में सहयोग दें।
मुंबई में साजरे होने वाले सभी त्योहार पर्यावरणपूरक पद्धति से मनाए जाएं, इसके लिए मुंबई की महापौर रितू तावड़े, उपमहापौर संजय घाड़ी, महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी और अतिरिक्त आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे सहित पूरा प्रशासन प्रयासरत है।
मंगलवार, 3 मार्च 2026 को मनाए जाने वाले धुलिवंदन के अवसर पर भी नागरिकों से पानी की बर्बादी न करने की अपील की गई है। प्रशासन ने कहा है कि रंगों के इस त्योहार को मनाते समय प्राकृतिक और जैविक रंगों का उपयोग करें। त्वचा के लिए सुरक्षित और बच्चों के लिए हानिरहित रंगों का ही इस्तेमाल किया जाए। कृत्रिम रंगों में मौजूद रसायन और भारी धातुएं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं, इसलिए उनसे बचना आवश्यक है।
महानगरपालिका ने यह भी कहा है कि यथासंभव सूखे रंगों का उपयोग कर पानी की बचत की जाए। साथ ही होली और रंगपंचमी के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखा जाए। विशेष रूप से अस्पतालों, रिहायशी इलाकों और संवेदनशील स्थानों के आसपास ध्वनि स्तर मर्यादित रखने की अपील की गई है।
महानगरपालिका ने सभी मुंबईकरों से आह्वान किया है कि वे होली का उत्सव उल्लास के साथ मनाएं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए मुंबई को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखने में सक्रिय सहयोग दें।