दुनिया को परमाणु युद्ध के खतरे से राहत देने वाली एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। ईरान ने परमाणु बम बनाने योग्य सामग्री कभी भी अपने पास न रखने पर सहमति जता दी है। यह जानकारी ओमान के विदेश मंत्री बदर अल्बुसैदी ने दी। उन्होंने इसे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित ऐतिहासिक शांति समझौते की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
वॉशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के बाद अल्बुसैदी ने कहा कि इस बार बातचीत का ढांचा पहले से अलग और ज्यादा सख्त है। नए प्रस्ताव की सबसे बड़ी विशेषता ‘जीरो स्टॉकपाइलिंग’ यानी ‘शून्य भंडारण’ की नीति है। इसका मतलब है कि ईरान अपने पास समृद्ध यूरेनियम का कोई भी भंडार नहीं रखेगा, जिससे परमाणु हथियार बनाना तकनीकी रूप से असंभव हो जाएगा।

अल्बुसैदी के मुताबिक, मौजूदा परमाणु स्टॉक को न्यूनतम स्तर पर लाकर उसे ऐसे ईंधन में बदला जाएगा जिसे दोबारा हथियार बनाने योग्य सामग्री में परिवर्तित नहीं किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान पूर्व में बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए समझौते का हिस्सा नहीं था और इस बार इसे स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता की रफ्तार को लेकर असंतोष जताया है। ट्रंप ‘नो एनरिचमेंट’ यानी यूरेनियम संवर्धन पर पूरी तरह प्रतिबंध चाहते हैं। इसके बावजूद ओमान को भरोसा है कि दोनों पक्ष इस बार समझौते को लेकर गंभीर हैं और कूटनीति के जरिए समाधान संभव है।
आगे की प्रक्रिया के तहत वियना में तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बातचीत होगी। नए समझौते की निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी निरीक्षकों को ईरान के परमाणु ठिकानों तक सीमित और नियंत्रित पहुंच भी दी जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में सुधार लाएगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता और पश्चिम एशिया में शांति के लिए भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।