रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। खूंखार नक्सली देवजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि देवजी के आत्मसमर्पण से बस्तर क्षेत्र में सक्रिय नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। देवजी पर बस्तर में 131 से अधिक जवानों की हत्या में शामिल होने का आरोप रहा है। उसे ताड़मेटला और रानीबोदली जैसे बड़े हमलों का मास्टरमाइंड भी माना जाता है।
देवजी के सरेंडर के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर संगठन के शीर्ष नेताओं पर है। नक्सल संगठन के सबसे बड़े नेता मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना पर अलग-अलग राज्यों को मिलाकर करीब 3.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह फिलहाल भूमिगत है और बस्तर क्षेत्र में सक्रिय नेटवर्क को संचालित करने में उसकी अहम भूमिका रही है।

गणपति के अलावा मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर भी टॉप माओवादी लीडरों में शामिल है। उस पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित है। बताया जाता है कि वह पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी का सदस्य है तथा एंबुश की रणनीति बनाने, बंकर तैयार करने और नए कैडर की भर्ती में माहिर है। बस्तर और झारखंड में हुए कई हमलों में उसका नाम सामने आता रहा है।
बस्तर में फिलहाल करीब 200 नक्सलियों के सक्रिय होने का अनुमान है। सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन तय की है। ऐसे में देवजी के सरेंडर को अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शीर्ष नेताओं के आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी के बाद ही संगठन की कमर पूरी तरह टूटेगी। अब निगाहें गणपति और भास्कर जैसे बड़े चेहरों पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या आने वाले महीनों में बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त हो पाएगा या फिर संगठन किसी नए नेतृत्व के साथ खुद को फिर से खड़ा करने की कोशिश करेगा।