Home वेब स्टोरीजनारी वंदन बिल के नाम पर राजनीति? कांग्रेस का बीजेपी पर बड़ा हमला

नारी वंदन बिल के नाम पर राजनीति? कांग्रेस का बीजेपी पर बड़ा हमला

by Suhani Sharma
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नारी वंदन बिल और डी-लिमिटेशन को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने बीजेपी पर तीखा निशाना साधते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।
अतुल लोंढे ने कहा कि अगर बीजेपी वास्तव में महिलाओं के सम्मान और नारी वंदन को लेकर संवेदनशील होती, तो 2023 में बिल पास होने के बाद इसे 2024 से ही लागू किया जाता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।


उन्होंने आरोप लगाया कि जब पांच राज्यों में चुनाव चल रहे हैं और पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, तो इसके पीछे राजनीतिक रणनीति छिपी है। लोंढे के मुताबिक, नारी वंदन बिल की आड़ में असली मकसद डी-लिमिटेशन का एजेंडा आगे बढ़ाना है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि पहले सरकार का रुख था कि नारी वंदन बिल जनगणना के बाद लागू होगा, लेकिन अब अचानक डी-लिमिटेशन के साथ इसे जोड़ना कई सवाल खड़े करता है।


डी-लिमिटेशन प्रक्रिया पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि 2002 के कानून के मुताबिक इसमें स्वतंत्र आयोग और रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की भूमिका होनी चाहिए, लेकिन अब चुनाव आयोग को शामिल किया जा रहा है, जिस पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
लोंढे ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्गों के आरक्षण को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। साथ ही दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं का भी जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर जनसंख्या को ही एकमात्र आधार बनाया गया, तो उनके प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है।


उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब 29 अप्रैल के बाद सत्र बुलाया जा सकता था, तो चुनाव के बीच ही इसे क्यों आयोजित किया गया। साथ ही सरकार पर सर्वदलीय बैठक न बुलाने का आरोप भी लगाया।
अंत में कांग्रेस ने बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है और इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

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