मुंबई में मानसून से पहले नाले सफाई के काम को लेकर राजनीति तेज हो गई है। उपमहापौर संजय घाडी ने मुंबई महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि शहर और उपनगरों में नाले सफाई का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 31 मई तक सभी नालों की पूरी तरह सफाई हर हाल में पूरी की जाए।
संजय घाडी ने बताया कि बड़े नालों में जमा गाद निकालने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। सफाई के दौरान नालों से केवल कीचड़ ही नहीं, बल्कि थर्माकोल, प्लास्टिक की बोतलें और पुराने फर्नीचर जैसी भारी मात्रा में गंदगी भी निकल रही है। उन्होंने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की।
उपमहापौर ने कहा कि महानगरपालिका के नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई के करीब 5 हजार 420 दुकानों पर अब तक मराठी भाषा के बोर्ड नहीं लगाए गए हैं और ऐसे दुकानदारों को जल्द नियमों का पालन करना होगा।
इसके साथ ही ‘सामना’ में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई में मछली केवल बेचने का नहीं, बल्कि काटकर देने का नियम जारी रहना चाहिए। वहीं घर-घर से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित करने की व्यवस्था को भी सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।
संजय घाडी ने यह भी कहा कि कल होने वाले मंत्री दौरे के लिए उन्हें अब तक कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला है। वहीं महापौर द्वारा बिना पूर्व सूचना के अचानक नाले सफाई कार्यों का निरीक्षण किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।