अजित पवार के प्रति निष्ठा और समर्पण की एक भावुक तस्वीर सामने आई है। महाराष्ट्र की राजनीति में छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार भले ही मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन उनके एक सच्चे कार्यकर्ता का सपना और संकल्प आज भी लोगों की आंखें नम कर रहा है। नागपुर जिले के उमरेड निवासी विलास झोडपे ने अजित पवार के मुख्यमंत्री बनने तक अपने बाल न कटवाने का संकल्प लिया था। यह संकल्प उन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले लिया था, जो उनके दादा के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम को दर्शाता है।
नागपुर के हिवाळी अधिवेशन के दौरान जब अजित पवार को इस संकल्प की जानकारी मिली, तो उन्होंने खुद विलास झोडपे से मुलाकात कर उन्हें समझाया था कि लोकतंत्र में मुख्यमंत्री बनने के लिए संख्याबल जरूरी होता है, केवल ऐसे संकल्पों से कुछ नहीं होता। अजित पवार ने कार्यकर्ता से लोगों का काम करने और संगठन को मजबूत करने की सलाह दी थी।

28 जनवरी की सुबह विलास झोडपे अजित पवार से मिलने मुंबई पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्हें दादा के निधन की खबर मिली। यह खबर उनके लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी। इसके बाद वे सीधे मुंबई से बारामती पहुंचे और अपनी पत्नी व दो बच्चों को भी वहीं बुला लिया। पूरे परिवार के साथ उन्होंने अजित पवार के अंतिम दर्शन किए और अंत्येष्टि में शामिल हुए।
अंतिम संस्कार के बाद विलास झोडपे ने यह तय किया कि जो बाल उन्होंने अजित पवार के मुख्यमंत्री बनने के संकल्प के तहत बढ़ाए थे, अब उन्हें दादा को ही समर्पित करेंगे। बारामती में नीरा नदी के संगम पर उन्होंने मुंडन कर अपने नेता को अनोखी और भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। एक सच्चे कार्यकर्ता की यह भावना आज भी यह बताती है कि राजनीति सिर्फ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और भावनाओं का रिश्ता भी होती है।