मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। फ्रांस की एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत को राफेल लड़ाकू विमानों की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्रणालियों का सोर्स कोड नहीं दिया जाएगा। इस खुलासे के बाद वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और राफेल सौदे को “भारत विरोधी” करार दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक राफेल में इस्तेमाल होने वाला Thales का RBE2 AESA रडार, मॉड्यूलर मिशन कंप्यूटर, मॉड्यूलर डेटा प्रोसेसिंग यूनिट (जिसे विमान का ‘ब्रेन’ माना जाता है) और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम जैसे अहम सिस्टम का सोर्स कोड भारत को नहीं मिलेगा। इन प्रणालियों को राफेल की मारक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता का केंद्र माना जाता है।

19 फरवरी 2026 को किए गए अपने ट्वीट में प्रकाश आंबेडकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सीधे सवाल किए थे। उन्होंने पूछा था कि क्या भारत को राफेल का सोर्स कोड मिलेगा? क्या 100 प्रतिशत तकनीक हस्तांतरण की गारंटी दी गई है?
फ्रेंच रिपोर्ट के सामने आने के बाद आंबेडकर ने कहा कि उनकी आशंका सही साबित हुई है और भारत को सोर्स कोड नहीं मिलने से युद्ध की स्थिति में सामरिक कमजोरी पैदा हो सकती है। उन्होंने हालिया भारत-पाकिस्तान तनाव का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि यदि सोर्स कोड पर नियंत्रण नहीं होगा तो भारतीय हथियारों, जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, का स्वतंत्र एकीकरण सीमित हो सकता है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च कर ऐसे लड़ाकू विमान क्यों खरीदे गए, जिनकी प्रमुख तकनीकी प्रणाली पर भारत का पूर्ण नियंत्रण नहीं है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि मुख्य तकनीक विदेशी नियंत्रण में रहेगी तो आने वाले दशकों तक भारत की हवाई हमलावर क्षमता फ्रांस पर निर्भर रह सकती है।
प्रकाश आंबेडकर ने तीखे शब्दों में केंद्र सरकार से पूछा कि क्या सरकार पाकिस्तान और चीन के खिलाफ संभावित युद्ध में भारत को कमजोर स्थिति में रखना चाहती है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह सौदा किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव, विशेष रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव में किया गया था।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राफेल सौदे को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।