
केंद्र सरकार की तरफ से संसद में एक डेटा शेयर किया गया. डेटा के मुताबिक, 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA)की सरकार आने के बाद से अब तक 120 लोगों को प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दोषी ठहराया गया है. एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने इन 11 सालों में 6,312 PMLA केस रजिस्टर किए. सबसे ज्यादा 38 आरोपी को कोर्ट ने पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY-2024-25) में ही दोषी ठहराया. यह डेटा केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में शेयर किया.
उनके बताए गए डेटा से पता चलता है कि इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों की संख्या बहुत कम है. फेडरल फ़ाइनेंशियल क्राइम्स जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, उन्होंने दावा किया कि उनकी सजा का रेट लगभग 94% है. क्योंकि कोर्ट में सिर्फ़ 55 केस में ट्रायल पूरा हो पाया है. इनमें से 52 केस में 120 लोगों को सजा हुई है. एजेंसी ने पहले भी एक से ज्यादा मौकों पर यही स्टैंड लिया है. 2014 से पहले उसे कोई सजा नहीं मिली थी.
पंकज चौधरी ने कहा कि 1 जून 2014 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच ED ने PMLA के तहत 6,312 केस रजिस्टर किए. इनमें 1,805 प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) और 568 सप्लीमेंट्री चार्जशीट फाइल की गईं. एजेंसी ने सबसे ज़्यादा 333 केस 2024-25 में रजिस्टर किए. तब उन्होंने सबसे ज्यादा 38 लोगों को सजा दिलाई.
93 जांच को बंद कर दिया गया
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि 1 अगस्त 2019 को PMLA में बदलाव के बाद ED को स्पेशल कोर्ट के सामने अपने केस में क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने की इजाज़त मिली. एजेंसी ने 93 जांच बंद कर दी हैं.
PMLA में बदलाव के बाद ED को उन मामलों में स्पेशल कोर्ट ने PMLA के सामने क्लोजर रिपोर्ट फाइल करनी होती है. इसमें मनी-लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता. तब से ED ने 93 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट फाइल की है. इनमें मनी-लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता. जैसे कि शेड्यूल अपराध का मामला बंद होना. ऐसे मामले जिनमें कोर्ट को PMLA के तहत बताए गए शेड्यूल अपराध से जुड़ा कोई अपराध नहीं मिला.