Home वेब स्टोरीजकौन हैं वो 5 आतंकी जो 36 साल पहले रूबिया सईद अपहरण केस में छोड़े गए, अब कहां हैं?

कौन हैं वो 5 आतंकी जो 36 साल पहले रूबिया सईद अपहरण केस में छोड़े गए, अब कहां हैं?

by ashishppandya90@gmail.com
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कौन हैं वो 5 आतंकी जो 36 साल पहले रूबिया सईद अपहरण केस में छोड़े गए, अब कहां हैं?

ये दौर था 1989 का जब गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद को किडनैप कर लिया गया था. ये किडनैपिंग उनके घर से महज 500 मीटर की दूरी पर पूरी तरह से प्लानिंग के साथ की गई. इस किडनैपिंग के पीछे का उद्देश्य जेल में बंद 5 आतंकियों की रिहाई कराना था. रूबिया की किडनैपिंग करने में सफल होने के बाद आतंकियों ने शर्त रखी कि वो तभी रूबिया को उसके घरवालों को सौपेंगे, जब उनके 5 साथियों को रिहा कर दिया जाएगा.

ये अपने साजिश में कामयाब हुए और उन 5 आतंकियों को रिहा करा लिया. जिन आतंकियों की रिहाई करानी थी वो कौन थे और किस संगठन से जुड़े हुए थे. जानते हैं अब वो कहां हैं.

कौन थे ये आतंकी?

ये जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के पांच जाने-माने आतंकी थे. इनका नाम हामिद शेख, अल्ताफ अहमद भट, नूर मोहम्मद कलवाल, जावेद अहमद जरगर और शेर खान था. इनमें से एक मुठभेड़ के दौरान हामिद शेख की 1992 में मौत हो गई.

इसमें नूर मोहम्मद कलवाल अभी जिंदा है और ये JKLF के लिए काम करता है. हाल ही में आए पुलिस के एक स्टेटमेंट के मुताबिक, ये अभी बीमार है और यहां का जोनल प्रेसिडेंट है. फिलहाल के लिए नूर मुहम्मद कलवाल की एक्टिविटीज़ पर बैन लगा दिया है. अल्ताफ अहमद भट, फिलहाल जीवित है और ये जम्मू कश्मीर साल्वेशन मूवमेंट के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहा है. ये अभी इस्लामाबाद में रहता है. शेरखान की रिहाई के कुछ समय बाद 1992 में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था.

लंदन में थे मुख्यमंत्री

जिस समय रूबिया का अपहरण हुआ था. उस समय मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला लंदन में थे. ऐसे में रूबिया के किडनैपिंग की गूंज लंदन पहुंची. फारूक अब्दुल्ला ने रूबिया सईद के बदले आतंकवादियों को छोड़ने के विचार का खुलकर विरोध किया था. अब्दुल्ला का आज तक मानना ​​है कि रूबिया सईद के अपहरण और IC-814 फ्लाइट हाईजैक में आतंकवादियों को छोड़ने से घाटी में आतंकवादी घटनाओं की संख्या में बढ़त देखने को मिली.

किडनैपिंग के पांच दिन बाद, 13 दिसंबर को सेंट्रल गवर्नमेंट ने जेल में बंद पांच आतंकवादियों को रिहा कर दिया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दो एंबेसडर कारें श्रीनगर के डाउनटाउन में रुकीं और उनमें से पांच आदमी उतरे. वे एक ऑटो-रिक्शा में बैठे और गायब हो गए. घाटी के पत्रकार ज़फ़र मेराज को फोन आया था कि हमें हमारे लड़के मिल गए हैं. लड़की जल्द ही अपने माता-पिता के पास होगी.

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