महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए अब मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इस फैसले को लागू करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसके तहत एक मई से 15 अगस्त तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने बताया कि इस अभियान का मकसद नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है, लेकिन सरकार फिलहाल सख्त दंडात्मक कार्रवाई से बचते हुए ड्राइवरों को मराठी सीखने का मौका दे रही है। उन्होंने साफ किया कि केवल मराठी नहीं जानने के आधार पर तुरंत लाइसेंस या परमिट रद्द नहीं किए जाएंगे।
सरकार का फोकस ड्राइवरों को प्रशिक्षित करने पर है। इसके लिए राज्य के सभी 59 आरटीओ कार्यालयों में मराठी सीखने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जो चालक प्रशिक्षण पूरा करेंगे, उन्हें प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा, जो भविष्य में लाइसेंस नवीनीकरण के लिए जरूरी होगा।
यह पूरा अभियान अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रविंद्र गायकवाड़ की अध्यक्षता में गठित समिति की निगरानी में चलेगा। 100 दिनों के इस अभियान की रिपोर्ट 16 अगस्त को सरकार के सामने पेश की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इस पहल का उद्देश्य किसी की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि गैर-मराठी भाषी चालकों को भाषा सिखाकर उन्हें व्यवस्था के अनुरूप बनाना है।
महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में प्रस्तावित संशोधन के तहत अब मोटर कैब के परमिट और लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किया जा रहा है।