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Inside Story: BJP से JMM का गठबंधन… हेमंत के लिए जरूसी या सियासी मजबूरी

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Inside Story: BJP से JMM का गठबंधन… हेमंत के लिए जरूसी या सियासी मजबूरी

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी तस्वीर में बदलाव की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. झारखंड में राजनीतिक परिवर्तन की चर्चाओं के पीछे कुछ हालिया सियासी घटनाक्रम हैं. दरअसल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिहार चुनाव से पहले से ही कांग्रेस और आरजेडी से पीछा छुड़ाने के मूड में थे. गठबंधन के बावजूद बिहार चुनाव में एक भी सीट JMM को नहीं देने के चलते वो कांग्रेस से खासे नाराज हो गए.

सूत्रों का दावा है कि बिहार चुनाव के दौरान सीएम हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली आए थे. इस दौरान उनकी मुलाकात बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता से हुई थी, जिसमें उन्होंने अपने सियासी प्लान को साझा किया था. उस वरिष्ठ नेता ने जो कि केंद्र में मंत्री भी हैं सीएम सोरेन से कहा था कि वो शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करके बताएंगे.

ठबंधन की बजाए सियासी तालमेल के पक्षधर

दरअसल सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बीजेपी के साथ गठबंधन की बजाए सियासी तालमेल के पक्षधर हैं. सीएम सोरेन को जानने वालों का कहना है कि सोरेन ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जिस तरह से जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक ने अपने-अपने राज्य में सरकार चलाई और केंद्र सरकार से भी अच्छे संबंध कायम रखे. साथ ही जरूरत पड़ने पर संसद में बीजेपी सरकार को सहयोग भी दिया. JMM के नेताओं का कहना है कि रही बात राज्य सरकार चलाने के जरिए जरूरी नंबर की तो JMM इसके लिए कांग्रेस RJD में सेंध लगा सकती है बशर्तें बीजेपी इसमें खेल खराब ना करें.

बीजेपी नेताओं का तर्क

वहीं बीजेपी के नेताओं का तर्क है कि बिना सत्ता में भागीदारी यानि गठबंधन के बीजेपी को झारखंड में JMM के साथ जाने से कोई फायदा नहीं होगा. नेताओं का कहना है कि अगर बीजेपी गठबंधन में जाती है तो JMM के परंपरागत आदिवासी वोटों का भरोसा, सहानुभूति और समर्थन भी बीजेपी को मिलेगा. साथ ही बीजेपी-JMM का गठबंधन होने से आने वाले समय में झारखंड से खाली हो रही राज्यसभा सीटों में बीजेपी की हिस्सेदारी भी मिलेगी. बीजेपी का ये भी मानना है कि JMM –बीजेपी के साथ आने का फायदा पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी हो सकता है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मजबूरी

इधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मजबूरी है कि राज्य का सरकारी खजाना लगभग खाली हो चुका है. राज्य सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं केंद्र की बीजेपी सरकार से सियासी टकराव के चलते समस्याओं से जूझ रही है. ऐसे में हेमंत सोरेन और बीजेपी के साथ आने से केंद्र सरकार बिहार और आंध्र प्रदेश की तर्ज पर झारखंड के लिए भी खजाना खोल देगी, जिसका फायदा झारखंड की जनता को होगा और हेमंत सरकार के चुनावी वादे भी पूरे हो सकेंगे.

हेमंत सोरेन और उनके कई करीबी भ्रष्टाचार के आरोपों में जांच एजेंसियों के शिकंजे में हैं. खुद सीएम सोरेन जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल रहकर आ चुके हैं. जानकारों का मानना है कि बीजेपी-JMM के साथ आने से हेमंत सोरेन के लिए ऐसे मामलों में भी राहत की संभावना बन सकती है.

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