Home वेब स्टोरीजखड्डे कायम 90 करोड़ का खेल! ‘खड्डामुक्ति’ के नाम पर बड़ा घोटाला?”

खड्डे कायम 90 करोड़ का खेल! ‘खड्डामुक्ति’ के नाम पर बड़ा घोटाला?”

by Real Khabren
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मुंबई में एक बार फिर सड़कों के खड्डों को लेकर सियासत गरमा गई है। ‘खड्डामुक्ति’ अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हर साल वही हाल बारिश आते ही सड़कें फिर गड्ढों से भर जाती हैं। इसी मुद्दे पर राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार गुट के प्रदेश प्रवक्ता और युवक मुंबई अध्यक्ष एडवोकेट अमोल मातेले ने गंभीर आरोप लगाए हैं।


मातेले ने मुंबई महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर को ई-मेल के जरिए विस्तृत शिकायत भेजी है। उनका दावा है कि ‘खड्डामुक्ति’ के नाम पर बड़े स्तर पर अनियमितताएं और संभावित भ्रष्टाचार हो रहा है। इस साल भी इस अभियान के लिए करीब 90 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है, लेकिन खर्च का स्पष्ट और पारदर्शी हिसाब सामने नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई सालों से सड़कों की मरम्मत पर भारी रकम खर्च की जा रही है, लेकिन नतीजा शून्य है। नए बने डामर और कंक्रीट के रास्ते कुछ ही समय में खराब हो जाते हैं, जिससे गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही, एक ही सड़कों पर बार-बार काम देकर फंड के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है। टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मातेले का कहना है कि ठेकेदारों के चयन में पारदर्शिता की कमी है और इसमें संगनमत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि “हर साल नए आंकड़े और नए वादे किए जाते हैं, लेकिन सड़कों की हालत जस की तस रहती है। खड्डे खत्म नहीं होते, लेकिन पैसों का खेल लगातार जारी है।”प्रशासन को भेजी गई शिकायत में कई अहम मांगें भी रखी गई हैं। इनमें पिछले पांच सालों के खर्च का ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करना, इस साल के 90 करोड़ के फंड का कामवार विवरण देना, सभी प्रोजेक्ट्स की थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच, खराब काम करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करना और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा, नागरिकों के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू करने की भी मांग की गई है। मातेले ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो आगे कानूनी कदम उठाए जाएंगे, जन आंदोलन किया जाएगा और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी।मुंबई में ‘खड्डामुक्ति’ अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि सवालों के घेरे में खड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है जहां जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी हो गया है।

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