Home वेब स्टोरीजमुंबई में बीजेपी का बड़ा हमला संजय राउत के बयान को बताया “वोट बंटने का संकेत”, महाविकास आघाड़ी पर उठाए सवाल

मुंबई में बीजेपी का बड़ा हमला संजय राउत के बयान को बताया “वोट बंटने का संकेत”, महाविकास आघाड़ी पर उठाए सवाल

by Real Khabren
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मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने महाविकास आघाड़ी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत के हालिया बयान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नवनाथ बन ने कहा कि विधान परिषद चुनाव को लेकर संजय राउत द्वारा दिया गया “अपने वोट संभालकर रखें” वाला बयान दरअसल महाविकास आघाड़ी में संभावित वोट बंटवारे का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि यह बयान उद्धव ठाकरे के लिए एक तरह की चेतावनी है कि अगर वे चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो सहयोगी दलों के बीच मतभेद के चलते हार का सामना करना पड़ सकता है।
बीजेपी नेता ने महाविकास आघाड़ी की एकजुटता पर भी सवाल उठाए और कहा कि गठबंधन के तीनों दल अलग-अलग दिशा में खड़े नजर आ रहे हैं, जिससे विधान परिषद चुनाव में एकमत होने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि आघाड़ी के अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।
नवनाथ बन ने आगे दावा किया कि कांग्रेस की ओर से उद्धव ठाकरे को निर्विरोध समर्थन देने के लिए शर्त रखी गई है कि भविष्य में राज्यसभा सीट संजय राउत की जगह कांग्रेस को दी जाए। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बीजेपी ने अपनी स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि महायुति पूरी तरह संगठित है, जिसमें देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार एकजुट होकर काम कर रहे हैं।
इसके साथ ही नवनाथ बन ने पश्चिम बंगाल के चुनावी हालात और मणिपुर मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाताओं पर किसी तरह का दबाव नहीं है और वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
मणिपुर पर टिप्पणी को लेकर उन्होंने संजय राउत पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह खुद वहां का दौरा कर चुके हैं, इसलिए विपक्ष को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
बीजेपी नेता ने अंत में उद्धव ठाकरे की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावों के दौरान वे मैदान में सक्रिय नहीं रहते, जबकि बीजेपी नेतृत्व कार्यकर्ताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करता है।
कुल मिलाकर, विधान परिषद चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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