महाराष्ट्र में प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने इस विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि यह कानून नागरिकों को मिले धर्म की स्वतंत्रता और अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार का उल्लंघन करता है। उनका दावा है कि इस तरह का कोई भी कानून न्यायिक जांच में टिक नहीं पाएगा और अदालत में चुनौती का सामना करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में पहले से लागू ऐसे कानून अदालतों में चुनौती झेल रहे हैं, ऐसे में महाराष्ट्र में भी इस विधेयक की वैधता पर सवाल उठना तय है।
आंबेडकर ने सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है, ताकि राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। उनका कहना है कि जबरन धर्मांतरण से निपटने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानून मौजूद हैं, इसलिए नए कानून की जरूरत नहीं है।
वहीं, राज्य सरकार का पक्ष है कि यह विधेयक जबरन धर्मांतरण और कथित ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। लेकिन विपक्ष लगातार इसकी संवैधानिक वैधता और मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।