Home वेब स्टोरीजनासिक TCS केस पर APCR का बड़ा दावा, FIR को बताया गलत; ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ नैरेटिव पर उठाए सवाल

नासिक TCS केस पर APCR का बड़ा दावा, FIR को बताया गलत; ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ नैरेटिव पर उठाए सवाल

by Real Khabren
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नासिक TCS केस पर APCR का

मुंबई में नासिक के चर्चित TCS मामले को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स यानी APCR ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट पेश की और इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए।


APCR ने आरोप लगाया कि यह केस एक खास मजहब को निशाना बनाकर तैयार किया गया है। संगठन के मुताबिक, पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR तथ्यों पर आधारित नहीं है और इसमें कई खामियां हैं। APCR ने साफ किया है कि वह इस FIR को हाई कोर्ट में चुनौती देगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। APCR का कहना है कि पहले ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और ‘वोट जिहाद’ जैसे नैरेटिव बनाए गए और अब ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ के जरिए एक नई बहस खड़ी की जा रही है। संगठन का आरोप है कि इससे मुसलमानों को, जो पहले से ही शिक्षा और रोजगार में पिछड़े हैं, कॉर्पोरेट सेक्टर से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
APCR ने यह भी कहा कि उसकी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि मीडिया ट्रायल के पहलुओं को भी उजागर किया जाएगा।
वहीं, इस मामले में अब तक कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एक आरोपी निदा खान अभी फरार बताई जा रही हैं। पुलिस की जांच जारी है और आधिकारिक तौर पर अभी तक पुलिस या TCS की ओर से APCR के आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसे में अब इस मामले की सच्चाई क्या है, यह आने वाले दिनों में जांच और अदालत की कार्रवाई के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल, यह मामला कानून के साथ-साथ सियासी और सामाजिक बहस का भी केंद्र बन गया है।

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