
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर सियासत तेज हो गई है और अब यह मुद्दा सत्ता पक्ष के भीतर ही टकराव की वजह बनता दिख रहा है।
ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर शिंदे गुट की शिवसेना में दो राय खुलकर सामने आ गई हैं।
राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक इस फैसले को 1 मई से हर हाल में लागू करने पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में काम करने वाले चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान होना जरूरी है, ताकि स्थानीय लोगों से संवाद में कोई दिक्कत न हो।
वहीं दूसरी तरफ, पार्टी के ही वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने इस सख्ती पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि मराठी भाषा का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी पर इसे जबरन थोपना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि चालकों से मराठी समझने और बोलने की अपेक्षा रखना ठीक है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाकर दंडात्मक कार्रवाई करना व्यावहारिक नहीं होगा।
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है, तो वहीं अंदरूनी मतभेद ने शिवसेना के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है।
इधर मुंबई के दहिसर इलाके में मनसे कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया। प्रदर्शन के दौरान संजय निरुपम के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली और उनकी गाड़ी को निशाना बनाते हुए हवा निकालने की घटना भी सामने आई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 1 मई से मराठी भाषा का यह नियम सख्ती से लागू हो पाएगा, या फिर पार्टी के भीतर बढ़ता विरोध सरकार के फैसले की राह में रुकावट बनेगा।